तिश्नगी

तिश्नगी प्रीत है, रीत है, गीत है
तिश्नगी प्यास है, हार है, जीत है

Wednesday, 1 June 2016

पुरानी ग़ज़ल नई दुनिया के नाम !!

देखा है ख़ाब आपको पाने के वास्ते
अच्छी दवा है दर्द भुलाने के वास्ते

माचिस की तीलियों से कोई पूछता नहीं
कुरबां हुई जो शम्अ जलाने के वास्ते

देखी न जाए ऐसी फटेहाल ज़िन्दगी
चप्पल रखे थी अपने सिराने के वास्ते

मैंने कहा उसे कि मुझे भूल भी जा अब
फ़ाका किये थी जो मेरे आने के वास्ते

तस्वीर पोंछते हुए किस्सा सुनाए माँ
बेटा गया विदेश कमाने के वास्ते

छीने न आँख से कोई बनता हुआ ‘सलिल’
ईंधन यही है आग जलाने के वास्ते

- आशीष नैथानी !!


3 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (03-06-2016) को "दो जून की रोटी" (चर्चा अंक-2362) (चर्चा अंक-2356) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत सुन्दर

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