तिश्नगी

तिश्नगी प्रीत है, रीत है, गीत है
तिश्नगी प्यास है, हार है, जीत है

Monday, 29 July 2013

फीकापन

एक लम्बी रात
जो गुजरती है तुम्हारे ख्वाब में,
तुम्हें निहारते हुए
बतियाते हुए
किस्से सुनते-सुनाते हुए ।

और जब ये रात ख़त्म होती है,
सूरज की किरणें
मेरे कमरे में बने रोशनदानों से
झाँकने लगती हैं,
मेरी नींद टूट जाती है तब ।

तुम्हारे ख्वाब के बाद
नींद का इस तरह टूट जाना,
महसूस होता है गोया
कि जायकेदार खीर खाने के बाद
कर दिया हो कुल्ला,
और मुँह में शेष रह गया हो
महज फीकापन ।













4 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज मंगलवार (30-07-2013) को <a href="http://charchamanch.blogspot.in/2013/07/1322.html“ मँ” चर्चा मंच <a href=" पर भी है!
    सादर...!
    चडॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. आपका हार्दिक धन्यवाद आदरणीय डॉ. शास्त्री जी जो आपने मेरी कविता को इतना मान दिया | :))))

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  3. Naithani G AAp to Hindi Poem Ke Sachin Bane Huye Ho .. Back TO Back Century.......
    Hum sab ki Dua aapke sath hain .AAp aise he hame aanandit karte rahe ........

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  4. बहुत-बहुत शुक्रिया भाई बिपिन भट्ट । आपकी मुहब्बतों का ही नतीजा है कि कुछ लिख पा रहा हूँ । :)
    प्रेम बना रहे !!!

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