तिश्नगी

तिश्नगी प्रीत है, रीत है, गीत है
तिश्नगी प्यास है, हार है, जीत है

Sunday, 1 April 2012

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हर किसी को मिलती है किये की सजा |
किसी को मोहब्बत,
किसी को हिकारत,
किसी को क़ज़ा,
हर किसी को मिलती है किये की सजा |
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छंट गया रात का कालापन और गले मिली परछाई,
दूर किसी झुरमुट से रोशन बाला दिल में आई |
कुछ अधरों पर हँसी लिए और कुछ रख तोहफे में,
वो नादाँ तपस्वी के घर पैदल मिलने आयी ||

--------------------- "आशीष नैथानी/ हैदराबाद" ----------------------

गजल / अपने दिल को समंदर बना रहा हूँ मैं


अपने दिल को समंदर बना रहा हूँ मैं,

खुद से कुछ राज छुपा रहा हूँ मैं |


मिल न सकी मेरी गजल से मौशिकी उनकी,

फिर भी बर्षात में बेफिक्र गा रहा हूँ मैं |


था जलजला ऐसा की ढह गयी इमारत दिल की,

किसी जलजले का 'निशाना' सजा रहा हूँ मैं |


पढ़ न ले राज कोई उनके मेरी आंखों में,

यही सबब की आजकल 'चश्मा' लगा रहा हूँ मैं |


उनकी खामोश जुबां हो मुकम्मल ख़त जैसे,

कोरा पैगाम भी पढ़ते जा रहा हूँ मैं |

खुद से कुछ राज छुपा रहा हूँ मैं || 


---------------- "आशीष नैथानी/ हैदराबाद" -------------

"गजल"

पलकों से गिरता हर आँसू मुडकर ये कहता है,
कोई मेरा अपना भी "जन्नत" में रहता है |

यादें तेरी पास मेरे और जिस्म पराया सा,
फिर भी दिल तन्हा-तन्हा, तन्हाई सहता है |

सीखी जिससे रिश्तेदारी, रश्मों की बुनियादें,
वो खुद ही रिश्तों से अब मुँह फेरे रहता है |

सोच रहा था, इस बार करूंगा राज की बातें,
क्या मालूम कि राज हमेशा राज ही रहता है |

मुझको जिस पर एतबार कुछ खुद से ज्यादा "भाई",
होकर रुखसत राख-राख गंगा में बहता है |
कोई मेरा अपना भी "जन्नत" में रहता है ||

--------------------- "आशीष नैथानी/ हैदराबाद" ----------------------