वफ़ा कीजै या फ़िर जफ़ा कीजै
इश्क़ में कुछ न कुछ नया कीजै।
बुरा कीजै या फिर भला कीजै
रस्म जीवन की है, अदा कीजै।
कागजों का न दम निकल जाए
रोशनाई न यूँ रँगा कीजै।
ग़म कोई उम्र भर नहीं रहता
थोडा-थोडा सही, हँसा कीजै।
तितलियाँ बाग़-बाग़ उड़ती हैं
तितलियाँ हैं जनाब, क्या कीजै।
इश्क़ में कुछ न कुछ नया कीजै।
बुरा कीजै या फिर भला कीजै
रस्म जीवन की है, अदा कीजै।
कागजों का न दम निकल जाए
रोशनाई न यूँ रँगा कीजै।
ग़म कोई उम्र भर नहीं रहता
थोडा-थोडा सही, हँसा कीजै।
तितलियाँ बाग़-बाग़ उड़ती हैं
तितलियाँ हैं जनाब, क्या कीजै।
