तिश्नगी

तिश्नगी प्रीत है, रीत है, गीत है
तिश्नगी प्यास है, हार है, जीत है
Showing posts with label दोहा. Show all posts
Showing posts with label दोहा. Show all posts

Monday, 17 March 2014

होली दोहे !!



होली के पावन दिवस, ऐसे उड़े अबीर |
हरिद्वार में चमक उठे, जैसे गंगा तीर ||

फागुन पूनम आ गयी, आया प्रिय त्यौहार |
रंग लिए घर से चले, बाल प्रौढ़ नर नार ||

बच्चों के रंगे हुए, लाल बैंगनी गाल |
काला गोरा सब रँगा, रंगारंग कमाल ||

तितली को तितली लगे, उस दिन पूरा गाँव |
रंग पहनकर जब चलें, बादल पानी छाँव ||

कभी-कभी ही दीखती, आँखों में मुस्कान |
कभी-कभी इन्सान से मिल पाता इन्सान ||

पानी की बौछार से, सिहरा पूरा गात |
सुबह-सुबह की ठण्ड में, हाय कुठाराघात ||

गुजिया की मीठी महक और ठंडाई भाँग |
रंगों के त्यौहार पर, बस इतनी सी माँग ||

पीस कोयला खेलता, होली मेरा गाँव |
निशा रूप में रँग गए, मुँह हाथ और पाँव ||

अधरों पर प्रिय गीत है, काँधे पर है ढोल |
पूनम के उजले दिवस, मीठे-मीठे बोल ||

सरसों गेहूँ बाजरा, जाने कितने रंग |
रंग प्रेम में माँ धरा, कितनी हुई मलंग || 

रंगों से खेला करे, एक कृषक परिवार |
वृहद धरा की थाल पर, धान बाजरा ज्वार ||

संस्कृति पर हावी हुआ, वैश्विकता का दौर |
होली को ऑफिस लगे, बम्बइ या बंगलौर ||

स्वर्ण रंग सा चमकता, आजादी का घाम |
सीमा पर मुश्तैद है, सैनिक ! तुझे सलाम ||

चाहे सूखी खेलिए या खेलें लठमार |
होली के पर्याय हैं, प्रीत प्रेम औ' प्यार ||

उप्पल से कोथागुड़ा, इधर खैरताबाद |
इंद्रधनुष बन झूमता मस्त हैदराबाद ||